Tuesday, 9 September 2014

FOR & AGAINST




क्यों इस दिल को किसी की तालाश होती है … 
क्यों इस दिल को किसी की आस होती है ,
उस चाँद को देखो वो भी तो कितना तन्हा है … 
जबकि हर रोज चांदनी  से उसकी मुलाकात होती है।। 




इस दिल को किसी की भी तलाश नहीं होती है … 
ना ही इस दिल को किसी की आस होती है ,
अगर कोई कहे कि चाँद कितना तन्हा है … 
तो मैं नहीं मानती उस चाँद की तन्हाई को … 
क्योंकि चांदनी तो हर वक़्त उसके साथ होती है।। 

Saturday, 6 September 2014

RAAJ - E - MOHABBAT



कुछ उनकी वफाओं ने लूटा मुझको … 
कुछ उनकी अदाएं मार गई ।। 

हम राज -ऐ -मोहब्बत कह ना सके … 
चुप रहने की आदत मार गई ।। 

दिल ने बहुत मजबूर किया …  
मिलने  भी लाखों  बार गये ।।  

जी भर के उन्हें ना देख सके…  
आँखों की शराफत मार गई ।।  

Wednesday, 3 September 2014

GOODBYE FOREVER...



जिसपे किया था भरोसा,
उसी से ठोकर खाई है …
यूँ तो जिन्दगी हादसों से भरी है ,
पर सबसे बड़ा हादसा तेरी बेवफाई है ।। 

ये नसीब नसीब की बाते है ,
किसको क्या मिला … 
आज मेरे घर मातम ,
और तेरे घर शहनाई है ।।  

जुदाई सहते सहते ,
कफन से मोहब्बत कर ली है … 
अब क्या फर्क पड़ता है ,
तेरी शादी है या सगाई है ।। 

जमघट है लोगो का ,
तेरे घर भी और मेरे घर भी … 
उधर तेरी डोली ,
इधर मेरी अर्थी सजाई है ।। 

चार कंधो पर तू जाएगी ,
चार ही कंधो पर मैं… 
तेरी तो ये पहली ,
पर मेरी आखरी विदाई है ।।