Andaz-e-mahfil/Shayri/Poem
Saturday, 6 September 2014
RAAJ - E - MOHABBAT
कुछ उनकी वफाओं ने लूटा मुझको …
कुछ उनकी अदाएं मार गई ।।
हम राज -ऐ -मोहब्बत कह ना सके …
चुप रहने की आदत मार गई ।।
दिल ने बहुत मजबूर किया …
मिलने भी लाखों बार गये ।।
जी भर के उन्हें ना देख सके…
आँखों की शराफत मार गई ।।
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