क्यों इस दिल को किसी की तालाश होती है …
क्यों इस दिल को किसी की आस होती है ,
उस चाँद को देखो वो भी तो कितना तन्हा है …
जबकि हर रोज चांदनी से उसकी मुलाकात होती है।।
इस दिल को किसी की भी तलाश नहीं होती है …
ना ही इस दिल को किसी की आस होती है ,
अगर कोई कहे कि चाँद कितना तन्हा है …
तो मैं नहीं मानती उस चाँद की तन्हाई को …
क्योंकि चांदनी तो हर वक़्त उसके साथ होती है।।
















