जिसपे किया था भरोसा,
उसी से ठोकर खाई है …
यूँ तो जिन्दगी हादसों से भरी है ,
पर सबसे बड़ा हादसा तेरी बेवफाई है ।।
ये नसीब नसीब की बाते है ,
किसको क्या मिला …
आज मेरे घर मातम ,
और तेरे घर शहनाई है ।।
जुदाई सहते सहते ,
कफन से मोहब्बत कर ली है …
अब क्या फर्क पड़ता है ,
तेरी शादी है या सगाई है ।।
जमघट है लोगो का ,
तेरे घर भी और मेरे घर भी …
उधर तेरी डोली ,
इधर मेरी अर्थी सजाई है ।।
चार कंधो पर तू जाएगी ,
चार ही कंधो पर मैं…
तेरी तो ये पहली ,
पर मेरी आखरी विदाई है ।।

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