मैं मोहब्बत के पर लगाउँगा …
एक दिन तुझे ढूंढ ही लाऊँगा ।।
तू खफा है तो खफा ही सही …
मैं तो हर हाल में रिश्ता निभाउंगा ।।
मैं मुसाफिर तो दूर का हूँ …
पर मैं लौट कर भी आऊँगा ।।
लोग ग़ालिब के शेर गुनगुनाते हैं …
मैं तेरा ही नाम गुनगुनाउँगा ।।
अपने आंसुओं में भी …
हर पल तुझे हँसाऊँगा ।।
तेरे लिये ही जीता आया हूँ …
अब तेरे लिये ही मर जाऊँगा ।।












