कुछ तुम थे भूले भूले से …
कुछ मैं थी अपनी उलझन में ।।
उधर कहीं पर प्यार सिमट कर ,
कब का बिखर गया पलछिन (आसमान ) में ।।
ढूंढ रहे थे तुम जिसको ,
आतुर थी मैं भी पाने को …
वो प्यार निकट से निकल गया ,
हम रहे देखते उनमन (बिना मन )से ।।
कुछ तुम थे भूले भूले से …
कुछ मैं थी अपनी उलझन में ।।
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