Sunday, 24 August 2014

KUCH TUM THE BHULE BHULE SE...




कुछ तुम थे भूले भूले से  …  
कुछ मैं थी अपनी उलझन में ।।  

उधर कहीं पर प्यार सिमट कर  ,
कब का बिखर गया पलछिन (आसमान ) में ।।  

ढूंढ रहे थे तुम जिसको  ,
आतुर थी मैं भी पाने को  … 

वो प्यार निकट से निकल गया , 
हम रहे देखते उनमन (बिना मन )से ।।  

कुछ तुम थे भूले भूले से … 
कुछ मैं थी अपनी उलझन में ।।  

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