नफरत हि करनी है तो कर लो इस आँचल से …
पर किसी और के आँचल से प्यार कर पाओगे कैसे ।।
रुलाना ही चाहते हो तो रुला दो इस आँचल को…
पर किसी और के आँचल से आंसू पोंछ पाओगे कैसे ।।
भुलाना हि चाहते हो तो भुला दो इस आँचल को …
पर किसी और के आँचल में रह पाओगे कैसे ।।
मारना हि चाहते हो तो मार दो इस आँचल को …
पर किसी और के आँचल में जी पाओगे कैसे ।।
और आँचल के बिना मर पाओगे कैसे …

No comments:
Post a Comment