
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरी आँखों में ,
कि जब भी देखती हूँ …
खो जाने को जी चाहता है ।।

गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरी मुस्कुराहट में ,
कि चाहे जितनी बार भी रो लु …
एक तेरी हँसी में ,
फिर से मुस्कुराने को जी चाहता है ।।

गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरे छूने में ,
कि जब भी दूर जाती हूँ ...
फिर से पास आने को जी चाहता है ।।
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कि जितनी बार सुधरने की कोशिश करू …
उतनी बार गलती करने को जी चाहता है ।।
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरी बातों में ,
कि जितनी बार बात करती हूँ …
उतनी बार प्यार करने को जी चाहता है ।।
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरे गुस्से में ,
कि जितनी बार सुधरने की कोशिश करू …
उतनी बार गलती करने को जी चाहता है ।।
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …
कुछ तो गुस्ताकी है तेरी बातों में ,
कि जितनी बार बात करती हूँ …
उतनी बार प्यार करने को जी चाहता है ।।
गलती सिर्फ मेरी नहीं थी …

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